Recent Updates Toggle Comment Threads | Keyboard Shortcuts

  • Saurabh 10:43 am on September 5, 2017 Permalink | Reply  

    पूर्णविराम (www.poornviraam.online अब बन गया है (www.poornviraam.com) 

    cropped-logo-002.jpg

    कभी हँसते हुए छोड़ देती है” ये ज़िन्दगी!!_
    कभी रोते हुए छोड़ देती है ” ये ज़िन्दगी!!_
    “न पूर्ण विराम सुख में…._
    “न पूर्ण विराम दु:ख में…_
    बस जहाँ देखो वहाँ “अल्पविराम छोड़ देती है ये जिंदगी!!_
    “प्यार की डोर सजाये रखो !!_
    “दिल को दिल से मिलाये रखो!!_
    “क्या लेकर जाना है साथ में इस दुनिया से!!!_
    “मीठे बोल और अच्छे व्यवहार से_
    ” रिश्तों को बनाए रखो!!
    क्युकि जिन्दगी नही देती मौका हर बात के लिये
    तो लगा दो पूर्णविराम नई शुरूआत के लिये !

    पूर्णविराम की याञा मे जुडे –

    फेसबुक:  http://www.facebook.com/poornviraam

    टि्वटर: http://www.twitter.com/poornviraam

    व्हाटपैड: http://www.wattpad.com/poornviraam

    व्हाटसप:  http://www.is.gd/poornviraamgroup

     एप्प : http://www.is.gd/poornviraam

    और पढे http://www.poornviraam.online पर

     

     

    Advertisements
     
  • Saurabh 11:55 am on September 11, 2017 Permalink | Reply  

    पुनर्विवाह एक लघु कथा | पूर्णविराम 

    सुबह से ही रमेश बाबू के घर आज चहल-पहल थी .देवउठान एकादशी को ही उनकी पच्चीस वर्षीय विधवा बिटिया रेखा का पुनर्विवाह होने जा रहा था .विवाह-स्थल पर सादगी सेKa-Happy-Birthday-Poonam-Mehta-286x250 विवाह-संस्कार पूरे किये जा रहे थे .एक ओर एकत्रित आस-पड़ोस की महिलाओं की मण्डली इस विवाह के सम्बन्ध में अपनी अपनी राय ज़ाहिर कर रही थी .कमलेश बोली -”अरे मैं तो सोच रही थी कोई बड़ी उम्र का दूल्हा होगा ..भला विधवा और एक बच्चे की माँ से कोई कम उम्र का लड़का क्यों ब्याह करने लगा ? ..पर ये तो रेखा के साथ का ही लग रहा है और सुदर्शन भी है .” कमला सिर का पल्लू ठीक करते हुए बोली -” ठीक कह रही हो भाभी जी …रेखा से पूछा था मैंने कि दुल्हे की भी दूसरी शादी है क्या ?…बाल बच्चे भी हैं क्या ?…तो बोली ‘नहीं चाची जी ये इनकी पहली ही शादी है .” सुधा मुंह बनाती हुई बोली -” हो न हो कोई कमी तो है इस लड़के में वरना एक बच्चे की विधवा माँ से कोई कुंवारा क्यों ब्याह करने लगा भला …सरकारी अधिकारी है बड़ा ..तेरे ताऊ बता रहे थे .” नीला सुधा के कंधे पर हाथ रखते हुए बोली -” ताई जी ठीक कह रही हो कोई न कोई कमी तो जरूर है .” उन मधुमक्खियों की घिन-घिन तब टूटी जब फेरे पूरे हो गए और रमेश बाबू नवदम्पत्ति को आशीर्वाद देते हुए बोले -” तुम दोनों की जोड़ी हमेशा बनी रहे और बेटा तुमने जो भारतीय समाज की दकियानूसी सोच को दरकिनार कर मेरी विधवा बेटी के जीवन में फिर से खुशियां भरी हैं मैं इसके लिए तुम्हारा आभारी हूँ .” दूल्हे राजा ने रमेश बाबू के आगे हाथ जोड़ते हुए कहा -” मैंने कोई उपकार नहीं किया है .रेखा मुझे मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ जीवनसंगिनी लगी इसीलिए मैंने उसका हाथ आपसे मांग लिया और मुझे पता है कि यहाँ उपस्थित लगभग सभी का यही मत होगा कि मुझमे कोई न कोई कमी जरूर है जो मैंने एक बच्चे की विधवा माँ से विवाह का निश्चय किया .हाँ मुझमे बहुत बड़ी कमी है और वो है -मैं भारतीय समाज की दकियानूसी सोच के अनुसार नहीं चलता जो सोच ये कहती है कि एक विधवा लड़की को केवल बड़ी उम्र का ,विधुर पुरुष ही ब्याहकर ले जा सकता है .” दूल्हे राजा की ये बातें सुनकर कमला सुधा नीला के साथ साथ गाँव की औरते एक दुसरे का मुंह ताकते हुए सोचने लगी -” कहीं दूल्हे राजा ने हमारी बातें सुन तो नहीं ली ?”
    और शर्मिंदा हुई अपनी परम्परा और ओछी सोच को लेकर |
     
  • Saurabh 2:48 pm on September 10, 2017 Permalink | Reply  

    स्ञी का स्ञित्व ही सबसे बडा़ धन । पूर्णविराम 


    ———

    “ माँ ,आप कोर्ट में वही कहेंगी ,जो वकील ने आपको समझाया है ।”

    “ बेटा ,मैं बहुत टूट चुकी हूँ ।”-विवाह के बाद झेले सारे मानसिक ,शारीरिक दुखों की वेदना सावित्री के स्वर में फूट पड़ी ।

    “ माँ ,अभी आपकी टूटन के हिसाब का समय नहीं है।” “पिताजी को दुनिया भगवान मानती है ।उन पर इतना गन्दा इल्ज़ाम ! “

    “ वो ऐसा कर ही नहीं सकते । आपने जो देखा वो आपका भ्रम है ।”

    सावित्री व्यंग्य से -” वो क्या कर सकते हैं और क्या नहीं !

    एक पत्नी होने के नाते मुझसे बेहतर कौन जान सकता है !”

    “ और हाँ बेटा! माँ की टूटन पिता की दौलत के आगे क्या मायने रखती है !”

    सावित्री व्यंग्य ,निराशा को ओढे स्वार्थी बेटे को देख और सुन रही थी ।

    “ माँ ,बस ये याद रखना ,हमारा सारा वैभव ,ये दौलत,शान सब आपके बयान पर टिका है ।”

    “ ठीक है बेटा ,आज तक जुबान बन्द रखी ।

    आगे भी बन्द रखूंगी ।”–सावित्री ने अपनी बाजुओं पर पड़े जख्मों के दागों को घूरते हुए कहा ।

    “ हेलो ,आंटी जी ।”

    “कौन ?”-सावित्री ने अचानक फोन पर एक अपरिचित आवाज़ सुन कर कहा ।

    “ आंटी ,मैं वही लड़की हूँ ,जिसके ब्लात्कार के केस में आपको अभी थोड़ी देर में गवाही देनी है ।”

    “ आंटी ,आप ही एक चश्मदीद गवाह हैं ,जिसने उस रात बाबा जी यानी आपके पति को मेरा बलात्कार करते देखा था ।”

    “ मैं चुप रहूंगी ।नही बोलूंगी अपने पति के खिलाफ ।

    हमारी इज्जत ,हमारी सारी शान क्यों मिट्टी में मिलाऊँ ?”

    “ आंटी !पत्नी ,इज्जत ,शान इन सबसे पहले बस एक बार सोचिएगा —आप सबसे पहले एक स्त्री हैं !”–

    लड़की की सिसकती आवाज़ सावित्री को चीर गयी ।

    “ सावित्री देवी ,हाज़िर हों ।”

    सावित्री जज के सामने थी ।

    “ आपने उस रात क्या देखा ?”

    सावित्री ने एक नज़र सामने अपराधी बन खड़े पति को देखा !

    फिर नज़र घूमा वैभव व दौलत के लालची बेटे को देखा !

    कोर्ट रूम में मौजूद पति के पक्ष में खड़ी वकीलों की फौज , सत्ता के नुमाइंदों ,खरीदी हुई मीडिया—सभी पर दृष्टि डाली !

    कानों में उस रात की लड़की की चीखों को स्मरण किया !आंखों में पति की दरिन्दगी का दृश्य साकार किया!

    हलक में जमे शब्दों को पिघलाते हुए कहा –” जज साहब यही है वो इंसान ! जिसने उस रात लड़की का बलात्कार किया ।मैंने देखा ।”

    धन ,दौलत ,इज्जत ,शान ,पति ,बेटे,समाज के आगे एक स्त्री जीत गयी ।

     
  • Saurabh 7:55 pm on September 9, 2017 Permalink | Reply  

    रेयान इंटरनैशनल स्कूल प्रद्युम्न हत्याकांड । पूर्णविराम 

    मैं उस माँ के बारे में सोचूं तो सांस अटकने लगती है। दिल दर्द से भारी हो जाता है।एक एक पल कैसे पहाड़ सा बीत रहा होगा?7 साल का जिगर का टुकड़ा स्कूल गया और लौटा उसका शव।गला रेता हुआ।स्कूल के वाशरूम से मिला।स्कूल भी इंटरनेशनल।पैसे भी पानी की तरह बहाये।और भीतर ही बच्चा सुरक्षित ना रह पाया।बस के कंडक्टर ने वाशरूम में उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की,मासूम चीखा तो पकड़े जाने के डर से गला रेत दिया।’गला रेत दिया’? आईएसआईएस के खूँखार आतंकी दहशत फैलाने के लिए ऐसा करते थे।हमने खबरें भी खूब चलाई।लेकिन एक बस कंडक्टर चाकू के साथ बच्चे के वाशरूम तक घुस जाए, ये कैसे मुमकिन है।ये कोई आम स्कूल नहीं रायन इंटरनेशनल स्कूल है। स्कूल प्रबंधन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी।कंडक्टर अशोक गिरफ्तार।उसने जुर्म कबूल लिया है।लेकिन स्कूल प्रबंधन अपना गुनाह कब कबूलेगा?इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई? कंडक्टर का पुलिस वेरिफिकेशन क्यों नहीं कराया था?वो स्कूल में छोटे बच्चों के वाशरूम में बच्चे के साथ घुस कैसे गया?छोटे बच्चों के वाशरूम में कोई केयरटेकर क्यों नहीं था/थी ?स्कूल में लगे ज़्यादातर सीसीटीवी कैमरे काम क्यों नहीं कर रहे थे? इतने सवालों के बीच भी एफआईआर में स्कूल का कोई जिक्र नहीं था।अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर।स्कूल ढाई ढाई लाख एक साल का वसूलते हैं अभिभावकों से।किस बात के लिए? किस सुविधा,सुरक्षा के लिए? शिक्षा के मंदिर को पैसे उगाही का धंधा बना दिया है।सरकार को ऐसे स्कूल के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना होगा। सवाल ये भी कि अशोक जैसे मानसिक रूप से बीमार लेकिन दिखने में सामान्य दरिंदों से मासूमों को कैसे बचाएं? कुछ करना होगा और बहुत जल्द क्योंकि देश का भविष्य खतरे में है।प्रद्युमन की तस्वीर आंखों के सामने तैर रही है।नीला कोट जिसपर स्कूल का नाम।उसका मुस्कुराता चेहरा।जैसे हर ग़म का इलाज ।ये जब स्कूल से लौटता होगा तो घर जैसे फिर से जी उठता होगा।इसकी शरारतें,इसकी मस्ती,इसकी ज़िद,इसका रूठना और फिर मान जाना। इसके लिए कितने सपने देखे होंगे माँ बाप ने।हर दिन एक नई ख्वाहिश के साथ ये सुबह उठता होगा और माँ बाप की ज़िंदगी को नए मायने मिल जाते होंगे।लेकिन आज सब खत्म।बस प्रद्युमन का सामान,उसकी निशानी और उसकी निर्मम हत्या का कभी ना खत्म होने वाला दर्द।लोग कहते हैं माँ का दर्द एक माँ ही समझ सकती है। लेकिन जिसने सौ सपने अजन्मे बच्चे के लिए देखे हों।और घर से लेकर भविष्य तक उसी के इर्द गिर्द बुन डाला हो।वो समझ सकती है कि जो माँ 9 महीने कोख में रखने के बाद जन्म देने के दर्द को झेल प्रद्युमन को घर लायी होगी,7 साल उसे सीने से लगाकर रखा उसका आज क्या हाल हो रहा होगा।जिस बच्चे की एक हलचल पर नींद टूट जाती थी।बिन बोले जिसकी भूख प्यास सब समाझ लेती थी।बच्चे को ठोकर लगती तो जैसे कलेजा मुँह को आ जाता।उस माँ के जिगर के टुकड़े का गला रेता बेजान शरीर जब उसकी गोद में रखा गया होगा तो कैसे चीख पड़ी होगी वो। इस दर्द को सहना नामुम्किन है।एक वक्त मेरी ज़िंदगी में भी बहुत बुरा गुज़रा।लोग तसल्ली देते,हिम्मत से काम लेने को कहते। तो सहसा मेरे मुँह से यही निकलता “मेरी तकलीफ भगवान नहीं समझ सकता,इंसान क्या समझेगा”।एक-एक रात लगता दिल फटा जा रहा है। आंसुओं का सैलाब आ जाता लेकिन सीने कस बोझ कम ना होता।मुझे वो दर्द की इंतेहा लगी।लेकिन आज इस माँ के दर्द के आगे वो दर्द कितना बेमानी लग रहा है। हर औरत,हर माँ, प्रद्युमन की माँ की तकलीफ को आज महसूस कर रही होगी। हमारी ऊपरवाले से यही प्रार्थना है कि आपको ये दर्द बर्दाश्त करने की हिम्मत दे।इंसाफ देर सवेर मिल ही जायेगा।लेकिन बच्चे की कमी सालती रहेगी।आगे किसी और माँ को इस दर्द से गुजरना ना पड़े इसलिए लापरवाह स्कूलों के खिलाफ संग्राम छेड़ें तकतक जबतक सरकार की नींद नहीं टूटती और ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं लिया जाता।

    प्रद्युमन,आप इतने प्यारे हो कि जहां होगे वहां आप सबके चहेते होंगे। महफूज़ होंगे,बिना खौफ चहक रहे होगे। हमें माफ करना हमने आपको उम्मीद और आकांशा का फ़लक तो दिया लेकिन दरिंदों से बचने के लिए सुरक्षा का कवच नहीं दे पाए ।

     
  • Saurabh 7:47 pm on September 9, 2017 Permalink | Reply  

    पुरूष वो जो  पत्नी की इज्जत करे । पूर्णविराम  


    “ये दवा खा लीजिए”

    प्रसव के लिए गाँव के अस्पताल में भर्ती मीना को नर्स ने दवाई देते हुए कहा तो माँ जी सा एकदम से भड़क उठी

    ” बावली है के छोरी!

    आज सुहाग का व्रत है, एक घूँट पानी भी न पीएगी”

    “पर माँ जी सा…” नर्स ने बोलना चाहा।

    “सुई वुई से काम चाले तो चला ले, वर्ना काल तक तो निर्जला ही रैणो है इसे”

    माँ जी ने एकदम से फरमान जारी किया पर चेहरे पर न कोई शिकन न चिंता।

    “देखिए माँ जी ये दवाइयाँ देनी जरूरी हैं”

    इस बार डॉ ने समझाने की नाकाम कोशिश की।

    “और मेरा पूत! उसकी ज़िन्दगी! वो जरूरी ना है?

    हमणे भी बच्चे जने हैं, वो भी चार चार, मुझे न समझा के जरूरी है, जाओ अब अठे स”

    माँ जी सा अपनी बिंधनी के सिरहाने बैठ उसका माथा सहलाते हुए बोली।

    “बस आज आज की बात है बिंधनी, काल पानी भी पी लिए और या अंग्रेजी दवायाँ भी ”

    बाहर खड़े डॉ कुढने के सिवाय कर भी क्या सकते थे, आखिर यह अस्पताल माँ सा के रहमो करम पर ही तो चल रहा था।

    “डॉ साब, क्या बात है,”

    मीना के पति ने डॉ से पूछा, और सारा हाल सुन, कमरे में दवाइयाँ और पानी लेकर आया, और मीना को सहारा देकर बिठानेे लगा।

    “यो के करे है छोरा, बिंदनी को सुहाग को व्रत है।”

    “नही माँ, आज मीना नही मैं सुहाग का व्रत करूँगा, मेरी सलामती से ज्यादा, मुझे और मेरे आने वाले बच्चे को उसकी माँ की जरूरत है!”

     
  • Saurabh 7:38 pm on September 9, 2017 Permalink | Reply  

    महिलाओ पर अत्याचार । पूर्णविराम खबर 

    # महिलाओ_पर_अत्याचार

    20 जून को उत्तर प्रदेश एटा जिले के सभापुर गाँव में अपने दो बच्चों के साथ साथ रह रही 35 वर्षीय महिला को देर रात प्रभावशाली परिवार के युवकों ने बलात्कार के बाद जिन्दा जला दिया। पुलिस ने इसे आत्महत्या का रूप देने की भरसक कोशिश की, लेकिन जनता व मीडिया के भारी दबाव के चलते कामयाब न हो सकी।

    ये सब घटनाएं तो हाल ही में घटी घटनाओं की बानगी भर ही हैं। यदि सभी घटनाओं की गहराई में जाएं तो इंसान की रूह कांप जाए। नैशनल क्राइम ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार देश में दिनोंदिन महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधांे में बढ़ौतरी हो रही है। उसके देशभर के 35 शहरों के एक अध्ययन के अनुसार इस तरह के मामलों में दिल्ली अव्वल स्थान पर है और उसके बाद हैदराबाद का स्थान आता है। देश का कोई महानगर, शहर अथवा गाँव नहीं बचा है, जिसमें महिलाओं के साथ किसी न किसी तरह का अत्याचार न हो रहा हो। एक सामान्य अनुमान के अनुसार हर तीन मिनट में एक महिला किसी भी तरह के अत्याचार का शिकार हो रही है। देश में हर 29वें मिनट में एक महिला की अस्मत को लूटा जा रहा है। हर 77 मिनट में एक लड़की दहेज की आग में झोंकी जा रही है। हर 9वें मिनट में एक महिला अपने पति या रिश्तेदार की क्रूरता का शिकार हो रही है। हर 24वें मिनट में किसी न किसी कारण से एक महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो रही है। नैशनल क्राइम ब्यूरो के अनुमानों के अनुसार ही प्रतिदिन देश में 50 महिलाओं की इज्जत लूट ली जाती है, 480 महिलाओं को छेड़खानी का शिकार होना पड़ता है, 45 प्रतिशत महिलाएं पति की मार मजबूरी में सहती हैं, 19 महिलाएं दहेज की बलि चढ़ जाती हैं, 50 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हिंसा का शिकार होती हैं और हिंसा का शिकार 74.8 प्रतिशत महिलाएं प्रतिदिन आत्महत्या का प्रयास करती हैं।

    ये सब आंकड़े, घटनाएं, शोध, सर्वेक्षण और हालात देश में महिलाओं की स्थिति को स्वत: बयां कर रहे हैं। विडम्बना और अचरज का विषय तो यह है कि इन सबके बावजूद समाज का कोई भी वर्ग उतना गंभीर नजर नहीं आ रहा है, जितना कि आना चाहिए! प्रतिदिन एक से बढ़कर एक दरिन्दगी भरी घटनाओं को पढ़कर, सुनकर और देखकर एक सामान्य सी प्रतिक्रिया के बाद सामान्य क्रिया-कलापों में व्यस्त हो जाना, देश व समाज की निष्क्रियता एवं संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शाता है, जोकि भावी समाज के लिए सबसे घातक सिद्ध होने वाला है ।

     
c
Compose new post
j
Next post/Next comment
k
Previous post/Previous comment
r
Reply
e
Edit
o
Show/Hide comments
t
Go to top
l
Go to login
h
Show/Hide help
shift + esc
Cancel